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Urdu Shayari

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उनकी मोहब्बत के अभी निशान बाकी हैं
नाम मेरे लब पर हैं और मेरी जान बाकी है।
क्या हुआ अगर मुझे देखके फेर लेते हैं अपनी सूरत
तस्सली है की उनकी नज़र मैं अभी मेरी पहचान बाकी है।।

क्या नूऱ था वो जो दिल मैं उतर गया
परछाई जिन्दा रही इंसान मर गया।
ऐै दोपहर की धूप बता क्या जवाब दूँ
ये जमीन पूछती है की तेरा साया किधर गया।।

Urdu Shayari - Kya nooor tha vo jo dil main utar gaya

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते है जिस काफिर पे दम निकले

ग़ालिब

Urdu Shayari - Mohabbat main nahin hai fark

उनकी मोहब्बत के अभी निशान बाकी हैं नाम मेरे लब पर हैं और मेरी जान बाकी है। क्या हुआ अगर मुझे देखके फेर लेते हैं अपनी सूरत तस्सली है की उनकी नज़र मैं अभी मेरी पहचान बाकी है।।

Urdu Shayari - Unki mohabbat ke abhi nishan baaki hain

दिया है दिल अगर उस को , बशर है क्या कहिये,
हुआ रक़ीब तो वो , नामाबर है , क्या कहिये

यह ज़िद की आज न आये और आये बिन न रहे,
काजा से शिकवा हमें किस क़दर है , क्या कहिये

ज़ाहे -करिश्मा के यूँ दे रखा है हमको फरेब,
की बिन कहे ही उन्हें सब खबर है , क्या कहिये

समझ के करते हैं बाजार में वो पुर्सिश -ऐ -हाल,
की यह कहे की सर -ऐ -रहगुज़र है , क्या कहिये

तुम्हें नहीं है सर-ऐ-रिश्ता-ऐ-वफ़ा का ख्याल,
हमारे हाथ में कुछ है , मगर है क्या कहिये

कहा है किस ने की “ग़ालिब ” बुरा नहीं लेकिन,
सिवाय इसके की आशुफ़्तासार है क्या कहिये

ग़ालिब

Urdu Shayari - Diya hai dil agar usko

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल।
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है।।

ग़ालिब

Urdu Shayari - Ragon main daudte firne ke hum nahin kayal
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