Urdu Shayari

उनकी मोहब्बत के अभी निशान बाकी हैं
नाम मेरे लब पर हैं और मेरी जान बाकी है।
क्या हुआ अगर मुझे देखके फेर लेते हैं अपनी सूरत
तस्सली है की उनकी नज़र मैं अभी मेरी पहचान बाकी है।।

 

क्या नूऱ था वो जो दिल मैं उतर गया
परछाई जिन्दा रही इंसान मर गया।
ऐै दोपहर की धूप बता क्या जवाब दूँ
ये जमीन पूछती है की तेरा साया किधर गया।।

Urdu Shayari - Kya nooor tha vo jo dil main utar gaya

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते है जिस काफिर पे दम निकले

ग़ालिब

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